राज्यपालों की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

भारत की संघीय राजनीति में एक अहम फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्यपाल और राष्ट्रपति को किसी भी राज्य के बिलों पर समयसीमा तय करके फैसले देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका “डिम्ड असेंट” यानी समय समाप्त होने पर बिल स्वीकृति मान लेने का आदेश नहीं दे सकती।

इस फैसले के प्रभाव

यह फैसला भविष्य में—

  • राज्य सरकारों
  • राज्यपालों
  • केंद्र सरकार
    के बीच शक्ति-संतुलन को प्रभावित करेगा।
    कई राज्यों में लंबे समय से लंबित पड़े बिलों और टकराव की स्थितियों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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