बिहार की राजनीति में एक बार फिर इतिहास रचा गया है। राज्य के अनुभवी नेता नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर न केवल एक रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि बिहार की राजनीतिक धुरी आज भी उनके इर्द-गिर्द ही घूमती है।
एनडीए गठबंधन के तहत बनी इस नई सरकार में सामाजिक संतुलन, जातीय विविधता और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी गई है। शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक गलियारों की बड़ी हस्तियों की मौजूदगी ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार अभी भी केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर एक अहम राजनीतिक चेहरा बने हुए हैं।
नीतीश कुमार के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
- विकास कार्यों की गति बढ़ाना
- बेरोज़गारी और पलायन जैसे पुराने मुद्दों का समाधान
- गठबंधन राजनीति में संतुलन बनाकर रखना
- शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार
बिहार के मतदाताओं की उम्मीदें इस नए कार्यकाल से काफी जुड़ी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि यह ऐतिहासिक 10वां कार्यकाल बिहार को किस दिशा में ले जाता है।
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